tasavvuraat men vo zoom kar raha tha mujhe | तसव्वुरात में वो ज़ूम कर रहा था मुझे

  - Inaam Azmi

तसव्वुरात में वो ज़ूम कर रहा था मुझे
बहुत शदीद तवज्जोह का सामना था मुझे

चमक रहा था मैं सूरज के मिस्ल इस लिए दोस्त
कहीं पे जा के अँधेरे में डूबना था मुझे

मुझे वहाँ से उदासी बुला रही थी आज
जहाँ से शाम-ओ-सहर कोई देखता था मुझे

फिर उस को जा के बताना पड़ा ग़लत है ये
समझने वाले ने क्या क्या समझ रखा था मुझे

गुज़र न पाया था जो 'जौन-एलिया' से भी
तुम्हारे बा'द वो लम्हा गुज़ारना था मुझे

लहूलुहान हुए जा रहे थे हर मंज़र
किसी ने वक़्त के माथे पे यूँँ लिखा था मुझे

मैं अपनी नींद अगर टूटने नहीं देता
उस एक ख़्वाब से हर वक़्त टूटना था मुझे

  - Inaam Azmi

Aawargi Shayari

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