अपने मरकज़ से अगर दूर निकल जाओगेख़्वाब हो जाओगे अफ़्सानों में ढल जाओगेहम-सफ़र ढूँडो न रहबर का सहारा चाहोठोकरें खाओगे तो ख़ुद ही सँभल जाओगे— Iqbal Azeem