छोटी सी ज़िंदगी है गुज़ारो ख़ुशी के साथ

अपना मुवाज़ना नहीं करते किसी के साथ

या रब मेरे नसीब में कुछ माल-ओ-ज़र भी हो
कब तक जि
यूँगा ऐसे भला मुफ़लिसी के साथ

शायद कि इस लिए भी सुख़न-वर हुआ हूँ मैं
मेरी कभी बनी ही नहीं ज़िंदगी के साथ

'इरशाद' इक वो शख़्स कि जिस पर यक़ीन था
वो भी निकल चुका है सफ़र पर किसी के साथ

— Irshad 'Arsh'

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Kismat Shayari

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