आप ने फेर ली नज़र अपनी
अब मुझे ही नहीं ख़बर अपनी
आप की तो कमी रही लेकिन
ज़िन्दगी हो गई बसर अपनी
मुड़ के देखा तो ये नज़र आया
कितनी मुश्किल थी ये डगर अपनी
शाम क़िस्मत में मेरी हो कि न हो
शाद कर लूँ मैं दोपहर अपनी
— Javed Aslam
अब मुझे ही नहीं ख़बर अपनी
आप की तो कमी रही लेकिन
ज़िन्दगी हो गई बसर अपनी
मुड़ के देखा तो ये नज़र आया
कितनी मुश्किल थी ये डगर अपनी
शाम क़िस्मत में मेरी हो कि न हो
शाद कर लूँ मैं दोपहर अपनी
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