रंग-ओ-निकहत की औक़ात क्या पूछते
ग़ैर से आप की बात क्या पूछते
शहर-ए-गिर्या में कोई शनासा न था
बात रोने की बे-बात क्या पूछते
इस ज़बाँ को बिके एक मुद्दत हुई
तुम बताओ सवालात क्या पूछते
हाल अपना तो चेहरे से था सब अयाँ
लोग 'उदय' तेरे हालात क्या पूछते
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