मुझको क्या थी ये ख़बर ऐसी भी हालत होगी
'इश्क़ में तेरे मुझे सब सेे यूँँ नफ़रत होगी
तेरे आते ही मिरी जान मैं जी उठता हूँ
बाद जाने के तिरे यार क़यामत होगी
दिन गुज़रता है मगर रात से अफ़सुर्दा हूँ
गर तू आ जाए किसी शाम इनायत होगी
सोचती क्या है किसी से भी मुहब्बत कर ले
सबको मालूम यहाँ तेरी हक़ीक़त होगी
मान के तुझको ख़ुदा मैंने मुहब्बत की है
अब तिरे दर पे ही हर रोज़ इबादत होगी
कोई पल भर ही सही दिल को मिरे बहला दे
नाम उसके मिरी यादों की वसीयत होगी
जू'न हो जौन हो या हो कोई शाइर वाइर
सबकी बर्बादी में शामिल कोई औरत होगी
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