सभी से यार उल्फ़त है
ये कितनी गंदी आदत है
ज़रा सोचो कि मेरा दिल
सभी का है सियासत है
मुझे पहले ये लगता था
मुहब्बत ही इबादत है
वो शाइ'र दिल की लड़की है
मुझे उस पर भी लानत है
यही इक बात कहनी है
मुहब्बत से मुहब्बत है
मुझे अब शर्म आती है
मुझे बेहद ही हैरत है
— "Nadeem khan' Kaavish"















