यहाँ हर शख़्स रहता है गुमाँ में
बहुत दुश्वारियाँ है इस जहाँ में
बहुत हैरत से चारों ओर देखा
है मेरा घर नहीं मेरे मकाँ में
इसी उम्मीद पे ज़िंदा रहे हम
कि तुम से फिर मिलेंगे आसमाँ में
— "Nadeem khan' Kaavish"
बहुत दुश्वारियाँ है इस जहाँ में
बहुत हैरत से चारों ओर देखा
है मेरा घर नहीं मेरे मकाँ में
इसी उम्मीद पे ज़िंदा रहे हम
कि तुम से फिर मिलेंगे आसमाँ में
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