
सभी सीरत, सभी सूरत, सभी एहसास में हो तुम
मेरी आँखों की इक ही आस हैं, उस आस में हो तुम
मेरे ख़्वाबों में आ कर ख़ुद को तुम अच्छा बताते हो
चलो मैं मान लेता हूँ ख़ुदा के ख़ास में हो तुम
परेशानी में जैसे हाथ मेरे सर पे होता है
मुझे महसूस होता है कि जैसे पास में हो तुम
— "Nadeem khan' Kaavish"















