
अकेले काट लेना ज़िंदगी, ख़ुद तर्बियत करना
तुम अपने जिस्म की हर एक पे खै़रात मत करना
अगर मैं मर गया तो यार तुम रोना नहीं बिल्कुल
मेरे हक़ में दुआ करना, दुआ-ए-मग़्फ़िरत करना
— "Nadeem khan' Kaavish"
Other sher from the same pen
Shers of dost.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling