इरादा ख़ुदकुशी का था, बहाना क्या बनाते हम
अगर मानो कि मर जाते तो किस-किस को रुलाते हम
कोई जो पूछता हम सेे मुहब्बत किसको कहते हैं
तो बेहद ही मुहब्बत से, मुहब्बत भी सिखाते हम
निकलता दायरे से, सोच तू हिम्मत अगर करता
तो तेरा हाथ लेने यार तेरे घर भी आते हम
यहाँ तो हर कोई खोया हुआ हैं प्यार में यारों
बताओ किस को अपनी ग़मज़दा ग़ज़लें सुनाते हम
किसी से हारना मुझको गंवारा ही नहीं लेकिन
तू चलता चाल उल्फ़त में तो ख़ुद ही हार जाते हम
तुम्हारे जाने का ये ग़म निकलता ही नहीं दिल से
ज़रा सोचो तो फिर कैसे किसी से दिल लगाते हम
Read Full