''याद''

जब कोई तेरी हरकतों पर मुस्कुराएगा
जब कोई अपनेपन से तुझे समझाएगा
जब कोई रूठ कर भी मान जाएगा तब ही
जब कोई जी भर कर तुझ को सताएगा
जब कोई हर बात को दिल से लगाएगा
ये दिल-नशीं जब कोई बेपरवाह हो कर
तुझ पे जान लुटाएगा देखियो तब भी
जब भी कोई तेरे लिए आँसू छलकाएगा
जब कोई बात बात पर तुझ से लड़ जाएगा
जब कोई प्यार से तुझे मेरी तरह सहलायेगा
जब कोई तेरे ग़म में शरीक हो जाएगा
जाँ तब तब मैं याद आऊँगा
जब कोई बिन स्वार्थ तुझे अपनाएगा
जब कोई तेरी हर ग़लती को भूल जाएगा
जब कोई तुझे अपने पलकों पर बिठाएगा
जब कोई तेरे आगे पागलपन दिखाएगा
तब तुझे मेरी याद आएगी हाँ ठीक तब
जब कोई ख़ुद को खो के रिश्ता निभाएगा
जब कोई तेरी ख़ामोशी पढ़ पाएगा देखलेना
जब कोई तेरी ख़ातिर ख़ुद को भूल जाएगा
जब भी कोई तुझे टूट के चाहेगा देखना
तब तुझे मेरी याद ज़रूर आएगी

— Akram Kolkatvi

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