यहाँ धरती से अंबर को मिलाए वो मुहब्बत हैफ़क़त जो आदमी को रब बनाए वो मुहब्बत हैकभी इस प्रेम में राधा दिवानी श्याम की जैसेकभी उस श्याम में मीरा समाए वो मुहब्बत है— Kamlesh Goyal