सनम तुम्हारी ये ताब-ए-महफ़िल

मिरे लिए है अज़ाब-ए-महफ़िल

करम इबादत भरम मुहब्बत
सितम रक़ाबत हिजाब-ए-महफ़िल

हबीब ले कर रक़ीब आए
बिगड़ गया था हिसाब-ए-महफ़िल

उड़े उड़े थे सभी के चेहरे
कहा मुझे जब जनाब-ए-महफ़िल

ये एक जमघट है शाइरों का
यहाँ सभी हैं नवाब-ए-महफ़िल

हुआ जो 'माही' तमाम अय्यार
हुआ भुला कर सवाब-ए-महफ़िल

— Karal 'Maahi'

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