ये सानेहा ही है कि मिला नाम का हुनर
हर ख़र-दिमाग़ शख़्स फिरे बन के बा-हुनर
ये मौसिक़ी का फ़न ये सुख़न और दिल-कशी
भरना पड़ा हो पेट तो किस काम का हुनर
तद्रीज ने बना दिया सब को यहाँ मुनीम
इक नौकरी के सामने किस का बचा हुनर
मुख़्तार क्या हुई जो हवा नौजवान की
सब को क़रार है कि मिला है बड़ा हुनर
ख़ुद का सवाब भूल गए अक़्ल-मंद लोग
'माही' सँभाल कर ही दिखाना तिरा हुनर
— Karal 'Maahi'















