मैं दिलकशी के काम से आगे नहीं गया
या'नी दुआ सलाम से आगे नहीं गया
मेरी अटक गई है मोहब्बत पे दास्ताँ
मैं तीसरे मक़ाम से आगे नहीं गया
मातम में तेरे हिज्र के बोतल खुली मगर
मैं तीन चार जाम से आगे नहीं गया
नज़रों में उस की हारे हुए बादशाह का
ओहदा किसी ग़ुलाम से आगे नहीं गया
सारा जहान चाँद के पीछे पड़ा रहा
लेकिन मैं तेरे नाम से आगे नहीं गया
हद से गुज़रने के मुझे कितने मवाक़े थे
लेकिन लबों के जाम से आगे नहीं गया
— Kartik Bhalerao















