उस में इक अच्छाई इक बुराई भी
उस में वफ़ादारी बे-वफ़ाई भी
काम वो दो एक साथ करती है
ज़ख़्म भी देती है और दवाई भी
यूँ ही नहीं सर पे ताज़ शोहरत का
हम ने कभी क़िस्मत आज़माई भी
सब से बड़ा तो नशा है यारी का
तू ने तो पी भी बहुत पिलाई भी
जिस को कमाने से ख़ौफ़ आता है
हम ने वो दौलत यहाँ उड़ाई भी
मैं ने जला दी चिता मोहब्बत की
वो किसी से दिल लगा के आई भी
— Kartik Bhalerao















