unhin aankhoñ men faaqe hai unhin aankhoñ men paani hai | उन्हीं आँखों में फ़ाक़े है उन्हीं आँखों में पानी है

  - Shayra kirti

उन्हीं आँखों में फ़ाक़े है उन्हीं आँखों में पानी है
'उम्र चौबीस के लड़के तेरी बातें गुमानी है

कभी तू आँख भरता है कभी तू सजदे करता है
कभी चोरी है नज़रों की कभी ये पासबानी है

वो दिल पे हाथ रखती है तू दिल को थाम लेता है
तुझे मालूम है ना इसके आगे जान जानी है

न कोई गर मगर ना पर किसी के बाप का ना डर
नए आशिक़ ; दीवानों का ये लहज़ा ख़ानदानी है

मुझे जी जी न बोला कर मुझे ये याद आता है
मेरी छब्बीस भी गुज़री तेरी चौबीस आनी है

यूँँ फ़ोनों पर नहीं होते कीर्ति हल सभी मसअले
उसे मिलकर के समझाना के क्या कुछ बे-मआनी है

  - Shayra kirti

Aashiq Shayari

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