ऐ दिल रूक जा
थम जा
ठहर जा
सब्र कर
धीरज धर
मंज़िल अभी दूर है
रास्तों का मज़ा ले
यूँ न ख़ुद को सज़ा दे
बस चला चल
रूक मत
पीछे मत देख
जो छूट गया सो छूट गया
जो रूठ गया सो रूठ गया
बीती बातें भुलाता चल
ऐ दिल बस चला चल
तेरा वास्ता
तेरी मंज़िल से है
तेरा ख़ुदा तेरे अंदर है
कर उस पर भरोसा
बस चला चल
बस चला चल
— Kumar Rishi















