कमाल है तुम कहते हो
दुनिया का दुख देख कर तुम को
दुख होता है..
लेकिन अपनी आँखों के सामने
अपने सपने मरते देखते हो
तब दुख क्यूँ नहीं होता है!
— Kumar Rishi
दुनिया का दुख देख कर तुम को
दुख होता है..
लेकिन अपनी आँखों के सामने
अपने सपने मरते देखते हो
तब दुख क्यूँ नहीं होता है!
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