आपकी याद में हम जब भी ग़ज़ल कहते हैं
ये हक़ीक़त है कि फिर अच्छी ग़ज़ल कहते हैं
'इश्क़ की बात है समझेंगे फ़क़त दीवाने
हम न हिंदी की न उर्दू की ग़ज़ल कहते हैं
सिर्फ़ उस्ताद के हाथों नहीं इसकी अस्मत
कुछ नए लोग भी अब अच्छी ग़ज़ल कहते हैं
अपने पुरखों की न जागीर समझ सुन भाई
हम भी शायर हैं मियाँ हम भी ग़ज़ल कहते हैं
हम विकास ऐसे हैं सानी नहीं जिनका कोई
जब भी कहते हैं तो मेआरी ग़ज़ल कहते हैं
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