kahiin koii jab nazar na aa.e ha | कहीं कोई जब नज़र न आए हमें बुलाना

  - Kumar Vikas

कहीं कोई जब नज़र न आए हमें बुलाना
जब अपने लगने लगें पराए हमें बुलाना

उमर बिताने का वा'दा करके तुम्हारा साथी
जो बीच रस्ते में छोड़ जाए हमें बुलाना

ख़ुशी में अपने भले न हम को शरीक करना
तुम्हारी आँखों में अश्क आए हमें बुलाना

ये फूल ख़ुश्बू ये चाँद तारे हसीं नज़ारे
जहान भर में कोई न भाए हमें बुलाना

हज़ार महफ़िल हज़ार ग़ज़लें हज़ार शायर
जो शे'र सुन के मज़ा न आए हमें बुलाना

  - Kumar Vikas

Wada Shayari

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