अच्छा है मुझ को मेरा बयाबान ख़ुश रहो
तुम ने तो पा लिया न गुलिस्तान ख़ुश रहो
मेरी ख़ुशी का है यही सामान ख़ुश रहो
पा लो हर इक मक़ाम मेरी जान ख़ुश रहो
मुश्किल था मेरे साथ सफ़र जानता हूँ मैं
रस्ता बदल के कर लिया आसान ख़ुश रहो
ख़ुद को ठिकाने ख़ुद ही लगा दूँगा एक दिन
मेरे लिए न होना परेशान ख़ुश रहो
दुनिया की सुन के मुझ से किनारा जो कर लिया
मत सोचो अब ये फ़ाएदा नुक़सान ख़ुश रहो
— Kumar Kaushal














