थक गए इस क़दर नहीं आएअश्क फिर काम पर नहीं आएउन के कोठे पे मर्द आते हैंउन के द्वारे पे वर नहीं आएख़्वाब की आँखें सूज जाती हैंनींद जब रात भर नहीं आएयूँ तुम्हारे ख़यालों में खोयामुझ को तुम भी नज़र नहीं आएअब मैं उस पार जा के देखूँगालोग क्यों लौट कर नहीं आए— Kumar Kaushal