आँख को आँसू के लाले पड़े हैंआबले पाँव में पाले पड़े हैंकौन बीनाई बना सूरज कीख़ुद जला है सो उजाले पड़े हैंवो भी परदेस बियाही गई हैऔर हम देश निकाले पड़े हैंभीड़ में कब मिले हैं शिव किसी कोराह में लाख शिवाले पड़े हैंछू लिया तह से बुलंदी तक इश्क़जिस्म सारे ही खँगाले पड़े हैंलौ चराग़ों की मुसलसल जली हैये नयन इस लिए काले पड़े हैं— KUNAL