tamaam 'umr bachaata raha KHuda us ko | तमाम 'उम्र बचाता रहा ख़ुदा उस को

  - Kushal Dauneria

तमाम 'उम्र बचाता रहा ख़ुदा उस को
किसी की लग ही गई फिर भी बद-दुआ' उस को

वो अपनी ज़िंदगी और दोस्तों में है मसरूफ़
मेरी तमाम परेशानियों से क्या उस को

तुम उस से कहना किसी दिन तबाह कर देगा
कम 'उम्र लड़कियों के दिल से खेलना उस को

बिछड़ते वक़्त उसे देख कर लगा जैसे
हर एक चीज़ का पहले से इल्म था उस को

हुनर-शनास किसी दिन क़रार कर देंगे
बनाने वाले तिरे फ़न की इंतिहा उस को

न जाने कौन सा पेशा है जिस में लगता है
हर एक शाम कोई आदमी नया उस को

उसे सताएँ मोहब्बत के लौटते मौसम
कभी भी रास न आए अमेरिका उस को

ख़ुदा मैं भी तिरी इस दुनिया को मिटा दूँगा
हमारे झगड़े में कुछ भी अगर हुआ उस को

  - Kushal Dauneria

Hunar Shayari

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