मैं सोचता हूँ कि इस ख़ैर-ओ-शर के बा'द है क्या फ़ज़ा तमाम नज़र है नज़र के बा'द है क्याशब इंतिज़ार-ए-सहर है सहर के बा'द है क्यादुआ बरा-ए-असर है असर के बा'द है क्याये रहगुज़र है तो इस रहगुज़र के बा'द है क्या— Mahboob Khizan