main ab tak jis par yaar bharosa karta tha | मैं अब तक जिस पर यार भरोसा करता था

  - Kabir Altamash

मैं अब तक जिस पर यार भरोसा करता था
वो जब भी करता था बस धोखा करता था

फिर उसके साथ मुनाफ़ा ये भी था मेरा
मैं जो कुछ भी करता था अच्छा करता था

करता रहता था यारों में जिसकी बातें
वो ही बातों से मुझको तन्हा करता था

मैं सोच समझ कर ही अब उसको छोड़ा हूँ
वो सपनों में भी मेरा पीछा करता था

यारों मैंने उसको तक अपना माना है
जो मुझको मेरे घर को गंदा करता था

  - Kabir Altamash

Ehsaas Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Kabir Altamash

As you were reading Shayari by Kabir Altamash

Similar Writers

our suggestion based on Kabir Altamash

Similar Moods

As you were reading Ehsaas Shayari Shayari