मैं अब तक जिस पर यार भरोसा करता था
वो जब भी करता था बस धोखा करता था
फिर उसके साथ मुनाफ़ा ये भी था मेरा
मैं जो कुछ भी करता था अच्छा करता था
करता रहता था यारों में जिसकी बातें
वो ही बातों से मुझको तन्हा करता था
मैं सोच समझ कर ही अब उसको छोड़ा हूँ
वो सपनों में भी मेरा पीछा करता था
यारों मैंने उसको तक अपना माना है
जो मुझको मेरे घर को गंदा करता था
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