तुम्हारे दिल से निकल कर पछता रहे हैं हम
सितम तो ये है कि दिल को समझा रहे हैं हम
कि आओ मुझको चले जाओ तुम कहीं ले कर
बहुत अपने आप से अब उकता रहे हैं हम
तुम्हें क्या मालूम तुम तो अब आई हो लड़की
किसी लड़की के लिए ही क्या क्या रहे हैं हम
तुम्हारा ये प्यार हम सेे क्या क्या कराएगा
ख़ुदा ने दी है ज़बाँ पर तुतला रहे हैं हम
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Kabir Altamash
our suggestion based on Kabir Altamash
As you were reading Ghayal Shayari Shayari