ज़िंदगी ज़िंदगी में नहीं अब
बात वो आशिक़ी में नहीं अब
जान तक दे गए लोग सोचो
प्यार ऐसा किसी में नहीं अब
इक नज़र आसमाँ पर है डाली
चाँद ख़ुद रौशनी में नहीं अब
बा'द तेरे सफ़र छोड़ आए
देख हम उस गली में नहीं अब
जो मिरा नाच कर होश खो दे
दम किसी मोरनी में नहीं अब
इश्क़ पर इक कहावत लिखी है
इश्क़ शामिल ख़ुशी में नहीं अब
दुख सभी लोगों का मसअला है
ये कमी बस मनी में नहीं अब
— Manish watan















