is manch pe aanaa kahaan aasaan tha | इस मंच पे आना कहाँ आसान था

  - Manohar Shimpi

इस मंच पे आना कहाँ आसान था
हासिल हुआ इस-वक़्त वो अरमान था

मिलना यहाँ सब सेे फ़क़त सपना न था
मिलके हुआ पूरा वही सम्मान था

पढ़ते रहे लिखते रहे हैं हम सभी
पढ़के ग़ज़ल लिखना कहाँ आसान था

जलते कभी बुझते दिए वो गाह के
देखे जिधर से एक रौशनदान था

शोहरत कभी ऐसे हमें मिलती नहीं
दिल से उसे पाना वही अरमान था

राह-ए-सफ़र में वक़्त क्यूँ इतना लगा
ये सोच के मैं भी बहुत हैरान था

हाथों लगा मेरे वही अनमोल था
कोई सुख़न-वर का वही दीवान था

  - Manohar Shimpi

Khwab Shayari

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