रोकिए उन को ना जाने दीजिए
प्यार से अब मुस्कुराने दीजिए
इश्क़ को गहराई गर देना है तो
रूठिए और फिर मनाने दीजिए
रख दिए है बाम पे सारे दिए
ज़ोर आंधी को लगाने दीजिए
आप क्यूँ झट से गले लग जाते है
पहले हम को आज़माने दीजिए
चाँद में होगा इज़ाफ़ ए रौशनी
उन को पर्दा तो उठाने दीजिए
— maqbul alam















