माना सब को सच्चा प्यार नहीं होता

पर झूठा भी तो हर बार नहीं होता

तुम को गर करना है तो कर सकते हो
लेकिन हम से लौट के वार नहीं होता

मन में रहने वाले को सब दिखता है
इस घर में कोई बेज़ार नहीं होता
इश्क़ तरीक़ा है करने वालों के लिए
दोस्त बदन इस का इज़हार नहीं होता

अब लोगों के चेहरे रंग बदलते हैं
आईना कोई हुशियार नहीं होता

उम्र बितानी पड़ती है इक हाँ के लिए
बातों से कुछ अपना यार नहीं होता

— Manish watan

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Izhar Shayari

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