naye deewano ko raaste ka bol deta hooñ | नए दिवानों को रस्ते का बोल देता हूँ

  - Vikas Rajput

नए दिवानों को रस्ते का बोल देता हूँ
पहुँच गया हूँ सो ख़तरे का बोल देता हूँ

किसी मक़ाम पे बे-ध्यानी है मेरी के मैं
कभी कभी तेरे हिस्से का बोल देता हूँ

वो और उसका भरम पहले सा रहे क़ायम
सो ख़ुद ही जाके मैं आगे का बोल देता हूँ

जो बोलता नहीं तो बोलता नहीं ख़ुद से
जो बोलने लगूँ. हफ़्ते का बोल देता हूँ

भटक गया हूँ मैं भी क़ाफ़िले में तेरे साथ
भटक गया हूँ तो नक़्शे का बोल देता हूँ

  - Vikas Rajput

Rahbar Shayari

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