बज़्म-ए-सुख़न की बढ़ती है इज़्ज़त हुज़ूर से
अश'आर को भी हो गई उल्फ़त हुज़ूर से
उन के क़दम पड़े हैं तो रौनक़ सी आ गई
घर हो गया है मेरा ये जन्नत हुज़ूर से
इस ज़ुर्म में शरीक हुए यार आज हम
करने लगे हैं हम तो मुहब्बत हुज़ूर से
चाहत है ये सँवार दें ज़ुल्फ़ों को आप की
मिल जाए काश हम को इजाज़त हुज़ूर से
हम को नजात मिलती नहीं ग़म से क्या करें
'मीना' यही है अपनी शिकायत हुज़ूर से
— Meena Bhatt















