चाँद मेरा कहाँ छुपा होगा
उन सितारों को कुछ पता होगा
जब कभी उस से राब्ता होगा
तो शुरू एक सिलसिला होगा
बारहा सोचती रहूँ उस को
क्या मुझे वो भी सोचता होगा
मेरी बेनाम चिट्ठियाँ पा कर
नाम क़ासिद से पूछता होगा
हाथ में चुभ रहा मिरे कब से
ख़ार शाख़-ए-गुलाब का होगा
मोगरे की महक हवा में है
खिलखिला कर सनम हँसा होगा
प्यार से मैं जिसे सताती हूँ
वो ख़फ़ा गर हुआ तो क्या होगा
— Meenakshi Masoom














