jo saamne toofaan ke aaya nahin karte | जो सामने तूफ़ान के आया नहीं करते

  - Meharban Amrohvi

जो सामने तूफ़ान के आया नहीं करते
हम ऐसे चराग़ों को जलाया नहीं करते

जो सुन के उड़ा देते हों हर बात हँसी में
अहवाल उन्हें दिल के सुनाया नहीं करते

किस तरह फले-फूले मोहब्बत ये हमारी
वो रूठ तो जाते हैं मनाया नहीं करते

रखते हैं मोबाइल में मोहब्बत की निशानी
अब फूल किताबों में छुपाया नहीं करते

तादाद सितारों की ज़ियादा तो है लेकिन
सूरज के मुक़ाबिल कभी आया नहीं करते

रिज़वान बने बैठे हैं वो लोग यहाँ पर
जो पैर कभी माँ के दबाया नहीं करते

कहते हैं बड़े बूढे की घट जाती हैं इज़्ज़त
हर रोज़ किसी के यहाँ जाया नहीं करते

  - Meharban Amrohvi

Rose Shayari

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