बेवजह उस को सदा देते हैं हमभर के पैमाना गिरा देते हैं हमजानते हैं चोट खाऍंगे मगरशम्अ' यादों की बुझा देते हैं हमअब तलक ज़िंदा है ख़्वाबों में जिसेरोज़ जान-ए-जाँ भुला देते हैं हम— Ankur Mishra