कहता हूँ मेरी जीत मेरी हार सेवाक़िफ़ नहीं दुनिया तिरे मेआ'र सेलड़ता हूँ लहरों की तरह दरिया से मैंहै रब्त आँखों को मिरी पतवार सेमुश्किल से चलता है मिरी साँसों का अबऐ ज़िंदगी ख़र्चा तिरे किरदार से— Ankur Mishra