baadal is baar chhato par nahin chhaane waale | बादल इस बार छतों पर नहीं छाने वाले

  - Mohit Dixit

बादल इस बार छतों पर नहीं छाने वाले
मुब्तला हैं कहीं बारिश में नहाने वाले

अब मोहल्ले में वो बे-फ़िक्र सी लड़की भी नहीं
जिसको आते थे हुनर 'इश्क़ जताने वाले

देख सकते हैं उसे छोड़ के जाते तो ये सुन
हम ज़माने तेरे पीछे नहीं आने वाले

उसका दुख देख के थोड़ी सी जलन होती है
जिस किसी को भी मुयस्सर हैं रुलाने वाले

किसे फ़ुरसत है निरे 'इश्क़ में रम जाने की
कौन सुनता है यहाँ गाने पुराने वाले

क़िस्मत ऐसी है कि पत्ता नहीं हिलता 'मोहित'
हौसले फिर भी हैं दुनिया को हिलाने वाले

  - Mohit Dixit

Aah Shayari

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