ये जो इक ज़ुल्फ़ तेरे गाल तक आई हुई है

इसने हम पर कोई बिजली सी गिराई हुई है

तू कभी हमपे नज़र फेरे करम फ़रमाए
कितनी आँखों ने ये उम्मीद लगाई हुई है

एक तो तू नज़र अंदाज़ बहुत करती है
उस पे हम ने तुझे हर बात बताई हुई है

हम को बस इस लिए तन्हाई जकड़ लेती है
हम ने इक उम्र मोहब्बत में बिताई हुई है

ऐसा लगता है कि पहले भी कभी आ चुके हैं
ज़िंदगी तू हमें जिस मोड़ पे लाई हुई है

परदे हिलते हैं तो लगता है कि तुम हो मोहित
इस हवा ने मेरी बेचैनी बढ़ाई हुई है

— Mohit Dixit

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Andaaz Shayari

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