गईं जो सर्दियाँ दरख़्त सूखने लगेहवा भी चीखने लगी ये दिन उदास हैंइन्हीं दिनों की इक सहर जुदा हुए थे हमइसीलिए तो आज भी ये दिन उदास हैं— Mohit Dixit