पंख कतर कर मुझको दिलबर फेंक दिया
अंबर से धरती पे लाकर फेंक दिया
मैं तो था आबाद नशेमन पर तुमने
ज़ीस्त को मेरी करके बंजर फेंक दिया
अपने आपको रौशन करके फिर उसने
तीली सा मुझको सुलगाकर फेंक दिया
झोली फैलाई, फूलों की ख़ाहिश में
मेरी सम्त उठाकर पत्थर फेंक दिया
पहले प्यार जताया मुझपर ख़ूब उसने
फिर ज़ालिम ने मुझपर, ख़ंजर फेंक दिया
आप की इज़्ज़त की ख़ातीर देखो हमने
अपने सर का ताज ज़मीं पर फेंक दिया
तुमने जब ऐलान-ए-जंग किया, हमने
अपने तन से खींच के बख्तर फेंक दिया
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