सब के कहने से इरादा नहीं बदला जाता
हर सहेली से दुपट्टा नहीं बदला जाता
हम तो शाइ'र है सियासत नहीं आती हम को
हम से मुँह देख कर लहजा नहीं बदला जाता
अब रुलाया है तो हसने पे ना मजबूर करो
रोज़ बीमार का नुस्ख़ा नहीं बदला जाता
ग़म से फ़ुर्सत ही कहाँ है के तुझे याद करूँं
इतनी लाशें हों तो कंधा नहीं बदला जाता
उम्र एक तल्ख़ हक़ीक़त है मुनव्वर फिर भी
जितने तुम बदले हो इतना नहीं बदला जाता
— Munawwar Rana















