ज़मीं से उस का सौदा हो गया है
हमारा बीज पौधा हो गया है
ज़रा सा भी नहीं सुनता हमारी
ख़ुदा क्या तू भी बहरा हो गया है
दुआ करिए मुहब्बत नइँ करे वो
वगरना उस को बेटा हो गया है
बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने लगा है
मियाँ उस्ताद शर्मा हो गया है
— Harsh Kumar
हमारा बीज पौधा हो गया है
ज़रा सा भी नहीं सुनता हमारी
ख़ुदा क्या तू भी बहरा हो गया है
दुआ करिए मुहब्बत नइँ करे वो
वगरना उस को बेटा हो गया है
बहुत अच्छी ग़ज़ल कहने लगा है
मियाँ उस्ताद शर्मा हो गया है
Other ghazal from the same pen
Shers of dua.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling