ग़म ये अंदर से खा रहा है मुझे
छोड़कर तू भी जा चुका है मुझे
अब मेरी मौत पर ही उतरेगा
तेरा ऐसा नशा चढ़ा है मुझे
फ़िक्र मेरी तुझे है कितनी जान
बोल मत साफ़ दिख रहा है मुझे
जब मेरे साथ ही नहीं रहना
क्यूँ दरीचे से देखता है मुझे
सोचता हूँ कभी मिलूँ ख़ुद से
और पूछूँ कि क्या हुआ है मुझे
मैं ने उस वक़्त खो दिया उस को
जब लगा था वो मिल गया है मुझे
— Murari Mandal















