वो जो मेरी ताबकारी में पिघलने लग गया
जो सितारा भी नहीं था वो भी जलने लग गया
ख़ूब-सूरत औरतों ने कर दी बीनाई अता
आँख मलने वाला आख़िर हाथ मलने लग गया
दूसरा पाँव नहीं रखने दिया मैं ने उसे
पहला पाँव रखते ही चश्मा उबलने लग गया
— Muzdum Khan
जो सितारा भी नहीं था वो भी जलने लग गया
ख़ूब-सूरत औरतों ने कर दी बीनाई अता
आँख मलने वाला आख़िर हाथ मलने लग गया
दूसरा पाँव नहीं रखने दिया मैं ने उसे
पहला पाँव रखते ही चश्मा उबलने लग गया
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