कोई फूल मुझ
में खिला दिया तेरे इश्क़ ने
मुझे रंग-साज़ बना दिया तेरे इश्क़ ने
उन्हें पाँच वक़्तों के चंद सज्दों से क्या गरज़
जिन्हें पूरा-पूरा झुका दिया तेरे इश्क़ ने
मैं वो ख़ाक हूँ कि जो धूल है तेरे पाऊँ की
मैं वो आब जिस को जला दिया तेरे इश्क़ ने
— Nadeem Bhabha















