कोई फूल मुझ
में खिला दिया तेरे 'इश्क़ ने
मुझे रंग-साज़ बना दिया तेरे 'इश्क़ ने
उन्हें पाँच वक़्तों के चंद सज्दों से क्या गरज़
जिन्हें पूरा-पूरा झुका दिया तेरे 'इश्क़ ने
मैं वो ख़ाक हूँ कि जो धूल है तेरे पाऊँ की
मैं वो आब जिसको जला दिया तेरे 'इश्क़ ने
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