mil rahe ho badi aqeedat se | मिल रहे हो बड़ी अक़ीदत से

  - Nadeem Bhabha

मिल रहे हो बड़ी अक़ीदत से
ख़ौफ़ आता है इतनी इज़्ज़त से

हम ज़ियादा बिगाड़ देते हैं
बच के रहना हमारी सोहबत से

लोग किरदार बनना चाहते हैं
जैसे मुमकिन है सब रियाज़त से

उस के दिल में उतरने लगता हूँ
जो मुझे देखता है नफ़रत से

ज़हर ईजाद हो गया इक दिन
लोग मरते थे पहले ग़ैरत से

पर्दा-दारों ने ख़ुद-कुशी कर ली
सहन झाँका गया किसी छत से

फ़ासले बढ़ गए रिफ़ाक़त में
दूरियाँ पड़ गई हैं क़ुर्बत से

उस ने मुझ को भुला दिया इक दिन
और भुलाया भी किस सुहूलत से

अपनी गर्दन झुका के बात करो
तुम निकाले गए हो जन्नत से

  - Nadeem Bhabha

Dosti Shayari

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