शदीद गिर्या का मतलब बता रहा था हमें

वो रो रहा था कि रोना सिखा रहा था हमें

हम उस के उट्ठे हुए हाथ की तरफ़ भागे
पता चला कि वो रस्ता दिखा रहा था हमें

पहाड़ उस के इलाक़े में ढेर होते हैं
वो अपने गाँव की बातें सुना रहा था हमें

हम अपने आप को वैसा बना समझ रहे थे
हमारे बारे में जैसा बता रहा था हमें

ज़रूर उस का कोई प्यास से मरा होगा
वो कितने प्यार से पानी पिला रहा था हमें

बुझा रहा था चराग़ों को अपनी साँसों से
और अपने नूर की लौ से जला रहा था हमें

— Nadeem Bhabha

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